चार्ल्स डिकेन्स
(अनुवाद राजीव रंजन सिंह)
क्रिसमस फायर के चारों ओर वे एक बड़ा सा घेरा बनाकर बैठे हुए थे। कुटुम्ब के इतने प्रतिष्ठित सदस्यों के रहते हुए कहानियाँ सुनाने के दौर की शुरुआत वह करे- इसमें उसे बेहद संकोच हो रहा था। उसने विनम्रतापूर्वक सुझाव दिया कि अधिक उचित यह होगा कि '' हमारे परम आदरणीय मेज़बान जोन'' ( जिनकी सेहत के लिए जाम उठाने की उसने विनती की थी) कृपापूर्वक इस सिलसिले की शुरुआत करें। जहाँ तक उसकी बात है, उसने कहा, उसे किसी भी तरह की अगुवाई करने की इतनी कम आदत है कि - लेकिन जब इतना कहते ही सब लोग शोर मचाने लगे और एक स्वर से जिद करने लगे कि इस सिलसिले की शुरुआत वही करे, वह कर सकता है और उसे करना चाहिए, तो उसने अपने हाथों को मलना छोड़ दिया, अपनी कुर्सी के नीचे से अपने पैरों को बाहर निकाला और कहानी कहना शुरू किया।
इसमें कोई सन्देह नहीं है (उस निर्धन कुटुम्बी ने कहा) कि आज जो मैं क़बूल करने जा रहा हूँ, उससे यहाँ जुटे हमारे कुटुम्ब के सभी सदस्य हैरान रह जाएंगे, ख़ासकर हमारे परम आदरणीय मेज़बान जोन, जिन्होंने आज के दिन अपनी उम्दा मेज़बानी से हम सब का दिल जीत लिया है। लेकिन इस कुटुम्ब में मुझ जैसे नाचीज़ के मुँह से निकली हुई किसी बात पर यदि आप हैरान हो सकते हैं, तो मेरे लिए यह गौरव की बात होगी। इसके बदले मैं केवल यही वचन दे सकता हूँ कि मैं जो कुछ बयान करने जा रहा हूँ, उसमें पूरी ईमानदारी बरतूंगा।
मैं वह नहीं हूँ जो मुझे समझा जाता है। मैं बिलकुल अलग चीज़ हूँ। शायद आगे कुछ और कहने के पहले बेहतर होगा कि मैं इस बात पर एक नज़र डालूँ कि मेरे बारे में लोगों की क्या धारणा है।
जो मैं बयान करने जा रहा हूँ यदि उसमें कुछ ग़लत हो, जिसकी काफी संभावना है (यहाँ निर्धन कुटुम्बी ने अपने चारों तरफ़ सहमती नज़र से देखा कि शायद कोई विरोध हो), तो यहाँ बैठे हमारे कुटुम्बीजन मेरी ग़लतफहमी दूर करेंगे। मेरे बारे में आम धारणा यह है कि मैं किसी और का नहीं बल्कि ख़ुद अपना दुश्मन हूँ; कि मुझे कभी किसी चीज़ में कोई खास कामयाबी नहीं मिली; कि मैं कारोबार में इसलिए नाकामयाब रहा क्योंकि मुझमें कारोबारी बुद्धि नहीं थी और इतना नादान था कि अपने साझेदार की बदनीयती को नहीं समझ पाया: कि मैं प्यार में नाकामयाब रहा, क्योंकि मुझे मूर्खता की हद तक यह भरोसा था कि क्रिस्टियाना कभी भी धोखा नहीं दे सकती; कि मैं अंकल चिल की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा क्योंकि दुनियावी मामलों में उतना तेज़ नहीं था जितना वे चाहते थे; कि ज़िन्दगी भर मेरा रवैया आम तौर पर ढीला-ढाला और निराशाजनक रहा है; कि मैं अभी उनसठ-साठ साल का कुँवारा शख़्स हूँ जो तिमाही गुज़ारे के रूप में मिलनेवाली बँधी हुई आय पर ज़िन्दा है, जिसके बारे में, मैं देख रहा हूँ, कि हमारे परम आदरणीय मेज़बान नहीं चाहते कि मैं कोई और चर्चा करूँ।
मेरी वर्तमान दिलचस्पियों और आदतों के बारे में लोगों का ख़याल कुछ इस प्रकार से है:
मैं क्लैफम रोड पर एक लॉज में रहता हूँ। यह एक बहुत ही प्रतिष्ठित घर के पिछले हिस्से का बेहद साफ़-सुथरा कमरा है। मुझसे ऐसी उम्मीद रखी जाती है कि यदि मेरी तबीयत नासाज़ नहीं है तो मैं दिन के समय घर पर न रहूँ और इसलिए मैं आम तौर पर सुबह नौ बजे कारोबार पर जाने के बहाने घर से निकल जाता हूँ। मैं अपना ब्रेकफ़ास्ट- रोल और मक्खन और आधा कप कॉफ़ी- वेस्टमिन्स्टर ब्रिज के निकट पुराने कॉफ़ी शॉप में लेता हूँ। इसके बाद मैं शहर जाता हूँ- पता नहीं क्यों- और गैरेवेज़ कॉफ़ी हाउस में बैठता हूँ, बाजार में टहलता हूँ, कुछ एक दफ्तरों और काउंटिंग हाउस में झाँकता हूँ, जहाँ मेरे कुछ सम्बन्धी या परिचित इतने भले हैं कि मुझे सह लेते हैं और यदि मौसम ठंढा हो तो मुझे आग के पास खड़ा रहने देते हैं। मैं पाँच बजे तक इसी तरह समय काटता हूँ और तब मैं भोजन करता हूँ, जिसका खर्च औसतन एक पेंस और एक तिहाई पेंस होता है। इसके बाद भी मेरे पास कुछ पैसे बच जाते हैं, जिन्हें मैं शाम के मनोरंजन पर- घर लौटते वक्त पुराने कॉफ़ी हाउस में चाय और कभी-कभी साथ में टोस्ट पर - खर्च करता हूँ। इस प्रकार जब घड़ी की सूई पूरा चक्कर लगा कर फिर से सुबह के घंटों की ओर इशारा करती है, तो मैं क्लैफम रोड की ओर वापस लौटता हूँ और अपने लॉज में दाख़िल होते ही बिस्तर में घुस जाता हूँ। आग मँहगी है और इस परिवार को उससे एतराज़ भी है, क्योंकि इससे उन्हें असुविधा होती है और कमरा गंदा हो जाता है।
कभी-कभी मेरा कोई सम्बन्धी या परिचित मुझ पर इतना मेहरबान हो जाता है कि मुझे डिनर पर बुलाता है। ऐसा छुट्टियों के मौक़ों पर होता है। इसके बाद मैं आम तौर पर पार्क में टहलता हूँ। मैं एकाकी हूँ और शायद ही कभी किसी और के साथ टहलता हूँ। ऐसी बात नहीं है कि मैं फटेहाल दिखता हूं इसलिए लोग मुझसे परहेज़ रखते हैं; नहीं, मैं क़तई फटेहाल नहीं दिखता । मैं हमेशा एक बहुत अच्छा सूट पहने रहता हूँ, जिसका रंग काला है ( दरअसल ऑक्सफोर्ड ब्लू है जो काला दिखता है और पहनने के बाद अधिक अच्छा लगता है); लेकिन आवाज़ नीची करके बोलने और ज़्यादा वक़्त चुप रहने की मेरी आदत हो गयी है। मेरे अन्दर उत्साह का भी अभाव है और मुझे यह पता है कि मैं एक आकर्षक साथी नहीं हूँ।
इस सामान्य नियम का एकमात्र अपवाद मेरे चचेरे भाई का बेटा, लिटिल फ्रैंक है। मेरे मन में इस बच्चे के लिए विशेष प्यार है और वह भी मेरे प्रति सदय है। वह स्वभाव से संकोची है। भीड़ के बीच वह छुप जाता है और लोग उसे भुला देते हैं। लेकिन उसकी और मेरी बहुत जमती है। कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि इस कुटुम्ब में जो अजीब सी हैसियत मैंने हासिल की है वह मेरे बाद इस निरीह बच्चे का भाग्य न बने। हम दोनों बहुत कम बातें करते हैं, फिर भी हम दोनों एक दूसरे को समझते हैं। हम हाथ में हाथ डाले इधर उधर टहलते रहते हैं; और बिना अधिक बोले वह जानता है कि मैं क्या सोचता हूँ और मैं जानता हूँ कि वह क्या सोचता है। जब वह बहुत छोटा था, मैं उसे खिलौने की दुकानों की खिड़कियों के पास ले जाता था और उसे अन्दर रखे खिलौने दिखाता था। यह अचरज की बात है कि वह कितनी जल्दी समझ गया था कि यदि मेरे हालात ठीक होते तो मैंने उसे ढेर सारे उपहार दिये होते।
लिटिल फ्रैंक और मैं जाकर मोन्युमेंट के बाहरी हिस्से को देखते हैं। उसे मोन्युमेंट बहुत पसन्द है। हम मोन्युमेंट के अलावा पुल देखने जाते हैं और वह सब देखते हैं जिन्हें मुफ़्त में देखा जा सकता है। अपने दो जन्म दिवसों पर हमने लज़ीज़ बीफ़ खाया और आधे दाम पर नाटक देखा और यह सब हम दोनों को बहुत अच्छा लगा। हम दोनों अक्सर लोम्बार्ड स्ट्रीट जाते हैं। एक बार मैंने उसे बताया था कि वहाँ चमकदमक और शानशौक़त है। तबसे वह लोम्बार्ड स्ट्रीट जाना बहुत पसन्द करता है। एक बार वहाँ टहलते हुए एक जेंटलमैन ने मेरी बग़ल से गुज़रते हुए कहा, ''सर, आपके बेटे ने अपना दस्ताना गिरा दिया है।'' यदि आप इतनी तुच्छ घटना पर मेरी प्रतिक्रिया को माफ़ कर सकें तो मैं आपको यक़ीन दिलाना चाहूंगा कि भूल से ही सही इस बच्चे को किसी के द्वारा मेरा माना जाना मेरे दिल को भीतर तक छू गया और मेरी आँखों में मूर्खता भरे आँसू आ गये।
जब लिटिल फ्रैंक को शहर के बाहर के स्कूल में भेजा जाएगा, मैं नहीं जानता तब मैं अपना समय कैसे बिताऊंगा। वैसे, मेरा इरादा है कि महीने में एक बार मैं उसके स्कूल तक पैदल जाऊंगा और किसी आधी छुट्टी के दिन उससे मिलूंगा। मैंने सुना है ऐसे समय वह मैदान में खेलता हुआ मिलेगा। यदि मेरी मुलाक़ात पर किसी को एतराज़ हो कि इससे बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा, तो मैं अपने आपको उससे छुपाकर उसे दूर से ही देखकर वापस लौट आऊंगा। उसकी माँ बहुत ऊँचे घराने से है और मुझे मालूम है कि वह इस बात को नापसन्द करती है कि हम दोनों बहुत देर तक साथ-साथ रहें। मैं जानता हूँ कि मुझसे किसी को ऐसी उम्मीद नहीं होगी कि मेरे कारण बच्चे के गुमसुम रहने वाले स्वभाव में कोई सुधार आएगा; लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि यदि हम दोनों को पूरी तरह अलग कर दिया गया तो उसकी पीड़ा केवल क्षण भर की पीड़ा नहीं होगी।
जब मैं क्लैफम रोड वाले लॉज में अन्तिम साँस लूंगा, तो इस दुनिया में मेरा जो कुछ बच जाएगा वह उससे भी कम होगा जो मेरे साथ जाएगा; लेकिन मेरे पास एक मिनिएचर चित्र है- एक प्रसन्न वदन लड़के का, जिसके बाल घुंघराले हैं और जिसकी खुली शर्ट पर नीचे तक झालर लहरा रहे हैं ( मुझे विश्वास नहीं होता है कि इसे मेरी माँ ने मेरे लिए खरीदा था)। इस मिनिएचर को बेचने पर कोई ख़ास कीमत नहीं मिलेगी। मैं विनती करूंगा कि यह फ्रैंक को दे दिया जाए। इसके साथ मैंने इस प्यारे बच्चे के नाम एक छोटा सा ख़त लिखा है, जिसमें मैंने कहा है कि उससे दूर जाने में मुझे बहुत दुख हो रहा है, हालाँकि मैंने यह भी क़बूल किया है कि इस धरती पर टिके रहने के लिए मेरे पास कोई कारण नहीं है। मैंने उसे मुख़्तसर सा मशवरा भी दिया है, जो मेरी सामर्थ्य के हिसाब से सर्वोत्तम मशवरा है, कि किसी और के शत्रु बनने के बजाय अपना शत्रु बनने के परिणाम से उसे सावधान रहना चाहिए। मैंने उसे सान्त्वना देने की कोशिश की है, क्योंकि मुझे डर है कि मेरी मृत्यु से उसे सदमा पहुँच सकता है। मैंने उसे लिखा है कि उसके सिवा मैं हर किसी के लिए एक फालतू आदमी था; कि इस बड़ी दुनिया में अपने लिए कोई जगह बनाने में नाकामयाब रहने के कारण मेरे लिए बेहतर है कि मैं यहाँ से कूच कर जाऊँ।
तो ( निर्धन कुटुम्बी ने अपना गला साफ़ करते हुए और अपनी आवाज़ थोड़ी ऊँची करते हुए कहा) मेरे बारे में आम राय यही है। अब, मेरी कहानी का उद्देश्य और प्रयोजन इस मायने में विलक्षण है कि मैं यह कहना चाहता हूँ कि यह सब ग़लत है। मेरी ज़िन्दगी ऐसी नहीं है और न मेरी आदतें ऐसी हैं। यहाँ तक कि मैं क्लैफम रोड का भी बाशिंदा नहीं हूँ। सच पूछा जाए तो मैं कभी-कभार ही वहाँ जाता हूँ। ज़्यादा वक़्त मैं एक- उस लफ़्ज को अपनी जुबान पर लाने में मुझे संकोच हो रहा है, क्योंकि इससे दिखावे की बू आती है- किले में रहता हूँ। मेरा मतलब पुराने जमाने के किसी बैरोन के निवास-स्थान से नहीं है, लेकिन फिर भी यह एक ऐसा भवन है जिसे हर कोई किले के नाम से जानता है। इसमें मेरे जीवन इतिहास की हर बात सुरक्षित है, जो इस प्रकार है:
यह उस समय की बात है, जब मैंने जोन स्पैटर (जो मेरा क्लर्क था) को अपना साझेदार बनाया था। तब मैं पचीस साल से भी कम उम्र का नौजवान था और अपने अंकल चिल के घर रहता था, जिनसे मैं ढेर सारी आस लगाये बैठा था। उसी समय मैंने क्रिस्टियाना के सामने शादी का प्रस्ताव रखा। मैं उसे काफ़ी अरसे से प्यार करता था। वह बेहद ख़ूबसूरत थी और हर तरह से आकर्षक थी। मुझे उसकी विधवा माँ पर ही संदेह था, क्योंकि मुझे ऐसा लगता था जैसे उसके मन में छल-कपट और पैसे का लोभ है; लेकिन क्रिस्टियाना की ख़ातिर मैं उसे भी यथासम्भव अच्छा ही समझता था। बचपन से ही मैंने क्रिस्टियाना के सिवा और किसी से प्यार नहीं किया था और वह मेरे लिए पूरी दुनिया थी- दरअसल पूरी दुनिया से बढ़कर थी।
क्रिस्टियाना ने अपनी माँ की रज़ामंदी से मेरा प्रस्ताव स्वीकार किया और मेरा मन ख़ुशी से नाच उठा। अपने अंकल चिल के घर मेरी ज़िन्दगी नीरस और उचाट थी। दुछत्ती पर जो मेरा कमरा था वह फीका, बदरंग और सर्द था, जैसे उत्तरी प्रदेश के किसी भयावह किले की छत पर बने कैदखाने की कोठरी हो। लेकिन, मेरे पास क्रिस्टियाना का प्यार था और इसलिए इस धरती पर मेरी और कोई ख़्वाइश नहीं थी। मैं किसी भी आदमी से अपनी किस्मत नहीं बदल सकता था।
दुख की बात यह थी कि अंकल चिल का सबसे बड़ा दुर्गुण उनकी धन-दौलत की लिप्सा था। वे धनी थे, लेकिन पूरे मक्खीचूस थे। वे पाई-पाई को दाँतों से पकड़ते थे, हर खर्च में कतर-ब्योंत करते थे और बिलकुल दयनीय ज़िन्दगी जीते थे। चूँकि क्रिस्टियाना के पास कोई धन-दौलत नहीं था इसलिए उसके साथ रिश्ते की बात अंकल को बताने में मुझे कुछ दिनों तक थोड़ा डर लगता रहा। आख़िरकार मैंने उन्हें एक ख़त लिखा जिसमें मैंने सारी बातें सच-सच बता दीं। एक रात सोने से ठीक पहले मैंने यह खत उनके हाथ में थमा दिया।
दूसरे दिन सुबह जब मैं दिसंबर की सर्द हवा में काँपते हुए सीढ़ियों से उतर रहा था तो मेरा मन आशंकाओं से भरा हुआ था। मेरे अंकल का घर गर्म नहीं किया जाता था और इसलिए वह बाहर की सड़क से भी अधिक सर्द था, क्योंकि सड़क पर तो कभी-कभी जाड़े की धूप चमकती थी और कम से कम हँसते-मुस्कराते चेहरों और उनकी गुज़रती आवाजों के कारण वहाँ हमेशा चहल-पहल बनी रहती थी। भारी मन से मैं उस लम्बे, नीची छत वाले ब्रेकफास्ट रूम में दाख़िल हुआ जहाँ मेरे अंकल बैठे हुए थे। यह एक बड़ा कमरा था जिसमें थोड़ी आग जल रही थी। एक बड़ी खिड़की थी जिसके शीशों पर बेघर लोगों के आंसुओं से भीगे चेहरे की तरह रात की बारिश के निशान थे। यह खिड़की एक वीरान अहाते की ओर खुलती थी जिसके पथरीले पेवमेंट पर जगह-जगह दरारें और आधी उखड़ी हुई लोहे की जंग लगी रेलिंग दिख रही थी और उससे भी आगे एक बदशक्ल इमारत थी, जो कभी डिसेक्टिंग रूम हुआ करता था ( उस महान सर्जन के जमाने में, जिन्होंने मेरे अंकल के पास यह मकान गिरवी रखा था)।
हमलोग रोज़ सुबह इतनी जल्दी जग जाते थे कि सर्दियों में हम ब्रेकफास्ट मोमबत्ती जलाकर करते थे। जब मैं कमरे में पहुँचा तो मेरे अंकल एक मोमबत्ती की धुँधली रोशनी के पीछे एक कुर्सी पर ठंढ के कारण इतने सिकुड़े-सिमटे बैठे थे कि मेज़ के करीब आने के बाद ही मैं उन्हें देख पाया।
मैंने अपना हाथ उनकी ओर बढ़ाया तो उन्होंने अपनी छड़ी उठायी ( अशक्त होने के कारण वे हमेशा छड़ी लेकर चलते थे ) और उससे मुझे धमकाते हुए कहा, ''यू फूल!''
''अंकल'' मैंने कहा, ''मैंने यह नहीं सोचा था कि आप इस बात पर इस तरह ख़फ़ा हो जाएंगे।''
सच में मुझे ऐसी उम्मीद नहीं थी, हालाँकि वे कठोर और चिड़चिड़े स्वभाव के थे।
''तुमने नहीं सोचा था?'' उन्होंने कहा, '' तुमने कब सोचा है? अबे हरामी कुत्ते, तुमने कब सोच-विचार किया है? कब हिसाब-किताब किया है? कब आनेवाले दिनों की चिन्ता की है?''
''अंकल, आप कड़वा बोल रहे हैं।''
'' मैं कड़वा बोल रहा हूँ? तुम जैसे कूढ़मग्ज़ के लिए तो यह फूलों की बारिश है!'' उन्होंने कहा, ''बेट्सी स्नैप! सुनो, जरा इन्हें देखो।''
बेट्सी स्नैप एक कुम्हलायी-मुरझायी, सतायी हुई, पिलपिली बुढ़िया थी, जो हमारी एकमात्र नौकरानी थी। सुबह की इस वेला में वह हस्बमामूल मेरे अंकल के पाँव दबा रही थी। मेरी ओर देखने का आदेश देते हुए अंकल ने अपनी बगल में झुकी हुई बेट्सी स्नैप के सिर को अपने कमजोर हाथों से पकड़ते हुए उसके चेहरे को मेरी ओर घुमा दिया। अपनी चिन्ता-परेशानी के बीच भी उस पल मेरे मन में अनायास एक ख़याल आया जो उन दोनों को सर्जन के जमाने के डिसेक्टिंग रूम के हालात से जोड़ रहा था।
''जरा इस लार टपकाते दुधमुँहे बच्चे को देखो!'' अंकल ने कहा, '' ये वह सज्जन हैं, जिनके बारे में लोग कहते हैं कि ये किसी और के नहीं ख़ुद अपने दुश्मन हैं। ये वह सज्जन हैं जो किसी को ''नहीं'' नहीं कह सकते। ये वह सज्जन हैं, जो अपने कारोबार में इतना ज्यादा लाभ कमा रहे थे कि इन्हें एक साझेदार तक रखना पड़ा। ये वह सज्जन हैं जो एक ऐसी लड़की से ब्याह रचाने जा रहे हैं, जिसके पास एक दमड़ी तक नहीं है और ये महाशय उन चुड़ैलों के चक्कर में आ गये हैं, जो दिन-रात मेरी मौत पर मंसूबे बाँध रहे हैं- मेरी मौत पर!''
मेरी समझ में अब आया कि अंकल का गुस्सा किस तरह सातवें आसमान पर है, क्योंकि यदि उन्होंने पूरी तरह अपना आपा नहीं खोया होता तो दुनिया में ऐसा कोई कारण नहीं था कि वे अपनी जुबान से ''मौत'' शब्द का उच्चारण करते। इस शब्द के प्रति उनके मन में इतनी हिक़ारत थी कि कुछ भी हो जाए उनके सामने न तो यह शब्द बोला जाता था और न इसकी ओर कोई इशारा ही किया जाता था।
''मेरी मौत पर!'' उन्होंने दोहराया। ऐसा लग रहा था जैसे इस शब्द के प्रति अपनी नफ़रत को चुनौती देकर वे मुझे चुनौती दे रहे हैं, ''मेरी मौत पर- मेरी मौत पर! लेकिन मैं सारे मंसूबों पर पानी फेर दूंगा। इस छत के नीचे तुम अपना आखिरी खाना खाओ और मैं दुआ करूँ कि खाते-खाते ही तुम्हारा दम घुट जाए!''
आप शायद सोचेंगे कि इन शब्दों के साथ आमंत्रण मिलने पर मेरे मुँह का ज़ायक़ा बिगड़ गया होगा; लेकिन मैं अपनी चिरपरिचित सीट पर बैठ गया। मैं देख रहा था कि अंकल मेरा परित्याग कर रहे हैं; इसके बावजूद मेरे लिए यह सब सहन करना कठिन नहीं था, क्योंकि मेरे पास क्रिस्टियाना का दिल था।
उन्होंने सदा की तरह ब्रेड और दूध का ब्रेकफास्ट लिया, लेकिन जिस मेज़ पर मैं बैठा था वहाँ नहीं, बल्कि अपनी कुर्सी को दूसरी दिशा में मोड़कर अपनी गोद में ही पात्र रखकर। ब्रेकफास्ट लेने के बाद उन्होंने सावधानी से मोमबत्ती बुझा दी। सर्द, स्याह, उदास दिन हम दोनों के सामने था।
'' मिस्टर माइकेल'' उन्होंने कहा, '' एक दूसरे से अलग होने के पहले मैं तुम्हारी मौजूदगी में इन महिलाओं से दो एक बात करना चाहूंगा।''
'' आपकी जैसी मरज़ी, सर'' मैंने कहा, '' लेकिन यदि आप सोचते हैं कि इस रिश्ते में पवित्र, नि:स्वार्थ और निष्ठापूर्ण प्रेम की भावना के बदले कोई और भावना है तो आप अपने आप को धोखा दे रहे हैं और हमारे साथ भी ज़्यादती कर रहे हैं।''
इसपर केवल '' तुम झूठ बोलते हो!'' बोलकर वे चुप हो गये।
हम दोनों आधी पिघली बर्फ और आधी जमी बारिश के बीच से गुज़रकर उस मकान तक पहुँचे जहाँ क्रिस्टियाना और उसकी माँ रहती थी। मेरे अंकल उन्हें अच्छी तरह जानते थे। वे दोनों ब्रेकफास्ट के लिए बैठ चुकी थीं और ऐसे समय में हमें देखकर उन्हें घोर आश्चर्य हो रहा था।
''आपका सेवक, मैम'' अंकल ने उसकी माँ से कहा, '' मैं यह कह सकता हूँ, मैम, कि मेरे आने का मक़सद आपकी समझ में आ गया होगा। मैं जानता हूँ यहाँ पर पवित्र, नि:स्वार्थ और निष्ठापूर्ण प्रेम की एक भरी-पूरी दुनिया सिमटी हुई है। मुझे खुशी है कि इस दुनिया को पूर्ण बनाने के लिए, इसमें जो भी कमी है उसे अपने साथ लेकर आया हूँ। ये रहा मैम, आपका दामाद और ... मिस, आपका शौहर! ये महाशय मेरे लिए पूरी तरह अजनबी हैं- लेकिन मेरी कामना है कि इन्हें अपने बुद्धिमत्तापूर्ण सौदे में पूरा आनन्द मिले।''
मुझपर गुर्राते हुए वे बाहर निकल गये। इसके बाद मैंने उन्हें कभी नहीं देखा।
यह समझना पूरी तरह गलत होगा ( निर्धन कुटुम्बी ने आगे कहा) कि मेरी प्रिय क्रिस्टियाना ने अपनी माँ द्वारा बार-बार समझाने पर और उसके दबाव में आकर एक रईस से शादी कर ली और आज के बदले वक़्त में जब भी वह अपनी गाड़ी में सवार होकर मेरी बग़ल से गुज़रती है तो गाड़ी के पहियों से उठने वाली धूल-गर्द मेरे ऊपर पड़ती है। नहीं, नहीं। उसने मुझसे शादी की।
हमारी शादी हमारी योजना से भी पहले हो गयी। यह सब ऐसे हुआ। मैंने एक सस्ता सा लॉज किराये पर लिया और क्रिस्टियाना की ख़ातिर बचत करने लगा और भविष्य की योजना बनाने लगा। इसी समय एक दिन उसने मुझे पूरी गम्भीरता के साथ कहा :
'' मेरे प्रिय माइकेल, मैंने तुम्हें अपना दिल दिया है। मैंने तुम्हें कहा है कि मैं तुम्हें प्यार करती हूँ और तुम्हारी जीवन संगिनी बनने के लिए तैयार हूँ । हमारे साथ जो भी अच्छा और बुरा घटा है, उन सभी परिवर्तनों के बीच मैं हमेशा तुम्हारी बनी रही, मानो हम दोनों उसी दिन विवाह-बंधन में बँध गये थे, जिस दिन तुमने मुझे वे शब्द कहे थे। मैं तुम्हें अच्छी तरह जानती हूँ और यह भी जानती हूँ कि यदि हम दोनों अलग किये गये और हमारा सम्बन्ध टूट गया तो इसका साया तुम्हारी पूरी ज़िन्दगी पर पड़ेगा।''
'' ईश्वर मेरी मदद करे, क्रिस्टियाना!'' मैंने कहा, '' तुमने जो कुछ कहा वह सच है!''
''माइकेल!'' उसने मेरे हाथों में अपना हाथ रखते हुए, नारी सुलभ समर्पण के साथ कहा, ''हम दोनों को अब अलग नहीं रहना चाहिए। मैं तुम्हें बताना चाहती हूँ कि तुम्हारे पास जो भी है उससे मैं संतुष्ट रह सकती हूँ और मैं यह भी जानती हूँ कि तुम भी खुश रहोगे। मैं यह सब अपने दिल की गहराइयों से कह रही हूँ। अकेले संघर्ष मत करो; हमें साथ-साथ संघर्ष करना चाहिए। मेरे प्रिय माइकेल, मैं तुमसे एक बात छुपाये हुए हूँ, जो उचित नहीं है। तुम्हें इसका अंदेशा नहीं होगा, लेकिन यह बात मुझे अन्दर ही अन्दर खाये जा रही है। मेरी माँ, बिना यह समझे कि तुमने जो कुछ भी खोया है, मेरे लिए खोया है और मेरे ऊपर भरोसा रखने के कारण खोया है , दौलत पर निगाह लगाये हुए बैठी है और किसी और से शादी करने के लिए मुझे परेशान कर रही है। मैं इसे नहीं सह सकती, क्योंकि इसे सहना तुम्हारे प्रति विश्वासघात करना है। यह सब देखते रहने से तो अच्छा है कि मैं तुम्हारे संघर्ष में हाथ बटाऊँ। जो घर तुम मुझे दे सकते हो उससे बेहतर घर मुझे नहीं चाहिए। मैं जानती हूँ जब मैं पूरी तरह से तुम्हारी हो जाऊंगी तो तुम और अधिक हिम्मत के साथ जिन्दगी में आगे बढ़ोगे और मेहनत करोगे। इसलिए जब भी तुम चाहो मैं शादी के लिए तैयार हूँ।''
सचमुच वह दिन मेरे सौभाग्य का दिन था। मेरे सामने एक नयी दुनिया खुल गयी। कुछ ही दिनों में हमने शादी कर ली और मैं अपनी पत्नी को अपने ख़ुशनुमा घर में ले आया। मैंने जिस निवास स्थान का ज़िक्र किया था, उसकी शुरुआत इसी के साथ हुई। उस दिन से हम दोनों उसी किले में रह रहे हैं। हमारे सभी बच्चों ने वहीं जन्म लिया। हमारी पहली संतान- जो अब शादीशुदा है- लड़की थी, जिसे हमने क्रिस्टियाना नाम दिया। उसके बेटे और लिटिल फ्रैंक में इतनी समानता है कि मैं उनमें कोई फ़र्क़ नहीं कर पाता।
मेरे साझेदार का जो मेरे प्रति व्यवहार है- इस बारे में भी भ्रांत धारणा फैली हुई है। जब मेरे अंकल और मेरे बीच दुर्भाग्यपूर्ण कलह हुआ तो यह सच नहीं है कि मेरे साझेदार ने मेरे प्रति बेरुखी का बर्ताव करना शुरू किया और यह भी सच नहीं है कि उसने धीरे-धीरे हमारे कारोबार को हथिया कर मुझे उससे बेदख़ल कर दिया। सच तो यह है कि वह मेरे साथ पूरी वफ़ादारी और सम्मान के साथ पेश हुआ।
हमारे संबंधों के बीच यह बदलाव आया:
जिस दिन मैं अपने अंकल से अलग हुआ, उसी दिन, काउंटिंग हाउस में मेरे सामान का ट्रंक पहुँचने के पहले ही (जिसे मेरे अंकल ने मेरे निकलने के बाद बिना भाड़ा चुकाये गाड़ी से बुक कर भेज दिया था), मैं नदी किनारे घाट के ऊपर बने अपने कारोबारी दफ़्तर में गया। वहाँ मैंने जोन स्पैटर को सारी घटना बतायी। इसे सुनकर जोन ने यह नहीं कहा कि दौलतमंद बुड्ढे मूर्तिमान सत्य हैं और प्यार-मोहब्बत कपोल कल्पना। उसने मुझे इस तरह संबोधित किया:
''माइकेल,'' जोन ने कहा, ''हम दोनों स्कूल में साथ-साथ थे और आम तौर पर तुमसे आगे रहने और तुमसे अधिक नाम कमाने की मेरी आदत थी।''
''हाँ, जोन'' मैंने कहा।
''हालाँकि'' जोन ने कहा, '' मैं तुमसे किताबें मांग कर ले जाता था और उन्हें खो देता था: तुम्हारा जेबख़र्च उधार लेता था और कभी वापस नहीं करता था; मैंने नया चाकू खरीदने में जितना ख़र्च किया था, उससे अधिक दाम पर मैंने तुम्हें भोथरा चाकू बेचा था; और खिड़कियों के शीशे मैंने तोड़े थे, लेकिन क़बूल तुमसे करवाया था।''
''ये सब ज़िक्र करने लायक बातें नहीं हैं, जोन स्पैटर'' मैंने कहा, ''लेकिन वाक़ई सच हैं।''
'' जब तुमने पहली बार इस नये कारोबार को शुरू किया, जो आज इतनी अच्छी तरह चल निकला है'' जोन ने कहा, '' मैं किसी भी तरह की नौकरी की तलाश में तुम्हारे पास आया और तुमने मुझे अपना क्लर्क बना लिया।''
'' यह भी ज़िक्र करने लायक नहीं है, मेरे प्रिय जोन स्पैटर'' मैंने कहा, '' फिर भी, उतना ही सच है।''
'' और जब तुमने देखा कि मेरे पास कारोबार करने की पैनी बुद्धि है और मैं तुम्हारे कारोबार के लिए सचमुच काम का आदमी हूँ, तो तुमने मुझे क्लर्क की हैसियत में रखना नहीं चाहा, बल्कि तुम्हें अधिक न्यायसंगत यह लगा कि मैं जल्द ही तुम्हारा साझेदार बन जाऊँ।''
'' तुमने जिन छोटी-छोटी बातों का ज़िक्र शुरू में किया था, उनकी तुलना में यह बात तो और भी ज़िक्र करने लायक नहीं है, जोन स्पैटर'' मैंने कहा, ''क्योंकि मुझे तुम्हारे गुणों और अपनी कमियों का हमेशा ख़याल था, ख़याल है।''
हमारे काउंटिंग हाउस की खिड़कियाँ किसी जहाज के पिछले हिस्से की खिड़कियों के समान थीं। मैं उन खिड़कियों से देख रहा था कि बाहर दो जहाज नदी के बहाव में साथ-साथ मन्थर गति से बढ़ रहे थे- ठीक वैसे ही जैसे जोन और मैं साथ- साथ आपसी विश्वास और भरोसे के साथ जीवन- यात्रा पर चल पड़े थे।
''तो, मेरे दोस्त'' जोन ने स्कूल के दिनों की तरह ही मेरी बाँह में बाँह डालकर मुझे क़रीब खींचते हुए कहा;'' इस दोस्ताना वातावरण में हम दोनों के बीच सही समझ होनी चाहिए। तुम बहुत भोले हो, माइकेल। तुम किसी और के नहीं, बल्कि ख़ुद अपने दुश्मन हो। यदि मैं अपने परिचितों के बीच कन्धे उचकाकर, सिर हिलाकर और आह भरकर तुम्हें ओछे रूप में पेश करूँ और तुमने जो मुझपर भरोसा किया है, उसका नाजायज़ फ़ायदा उठाऊँ...''
'' लेकिन तुम ऐसा कभी नहीं करोगे, जोन'' मैंने कहा।
''कभी नहीं'' उसने कहा '' लेकिन मैं बस एक स्थिति की बात कर रहा हूँ- मान लो मैं इस भरोसे का नाजायज़ फ़ायदा इस रूप में उठाऊँ कि अपने साझे कारोबार की कोई बात अंधेरे में रखूँ और कोई बात उजाले में, और कोई और बात धुँधलके में, और ऐसे ही मैं अपने मजबूत पहलू को और मजबूत बनाता जाऊँ और तुम्हारी कमजोरी को दिनोंदिन और कमजोर बनाता जाऊँ, तो आख़िरकार वह दिन आएगा जब मैं सुख और सम्पन्नता की ओर जाने वाले उच्च पथ का पथिक बनूंगा और तुम मीलों दूर किसी उजाड़ सर्वजनदलित पगडंडी पर छूट जाओगे।''
''बिलकुल''
''ऐसी स्थिति की हल्की सी संभावना से भी बचने के लिए, माइकेल'' जोन स्पैटर ने कहा,
'' हम दोनों के बीच पूरा खुलापन होना चाहिए। हमारे बीच कोई भी दुराव-छिपाव नहीं होना चाहिए और हम दोनों का केवल एक - साझा मक़सद होना चाहिए।''
'' मेरे प्रिय जोन स्पैटर'' मैंने उसे आश्वस्त किया, '' मैं भी यही चाहता था।''
'' और जब तुम इतने भोले हो'' जोन ने अपनी बात जारी रखी। उसके चेहरे पर मित्रता की चमक थी, '' तो तुम्हें मुझे इस बात की इजाज़त देनी चाहिए कि मैं तुम्हारे स्वभाव की जो यह कमी है उससे किसी और को फ़ायदा न उठाने दूँ; तुम्हें मुझसे यह आशा नहीं रखनी चाहिए कि मैं तुम्हारी इस कमी को नज़रअन्दाज करूँ या हँसी में उड़ा दूँ या..''
'' मेरे प्यारे जोन स्पैटर'' मैंने उसे बीच में टोका, '' मैं तुमसे यह उम्मीद नहीं रखता। मैं चाहता हूँ कि तुम मेरे स्वभाव में सुधार लाओ।''
''और मैं भी यही चाहता हूँ।'' जोन ने कहा।
''बिलकुल सही'' मैं चिल्लाया, '' हम दोनों का आख़िरी मक़सद एक ही है और इसलिए सम्मान और गौरव के साथ एक दूसरे पर पूरा भरोसा रखते हुए हम आगे बढ़ते जाएंगे और हमारी साझेदारी सफल और सुखद होगी।''
'' मुझे इसका पूरा यकीन है।'' जोन स्पैटर ने कहा।
हम दोनों ने पूरी गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया।
मैं जोन को अपने घर, किले में ले गया और उस दिन हमने भरपूर आनंद मनाया। हमारी साझेदारी फलने-फूलने लगी। मेरी हर कमी मेरा दोस्त और साझेदार पूरा करता था, जिसकी मुझे पहले से ही उम्मीद थी। वह कारोबार और मुझमें सुधार लाता था और मेरी मदद के कारण यदि उसकी ज़िन्दगी में थोड़ी भी तरक्की आयी थी तो उसके लिए वह बेहद एहसानमंद था।
मैं (निर्धन कुटुम्बी ने आग की ओर देखते हुए, अपने हाथों को धीरे-धीरे मलते हुए कहा) बहुत धनी नहीं हूँ। मैंने इसकी परवाह भी नहीं की; लेकिन मेरे पास पर्याप्त है- ज़िन्दगी की आम ज़रूरतों और चिन्ता-फिक्र से मुक्त हूँ। मेरा किला कोई महल नहीं है, लेकिन वह बेहद आरामदायक है। वहाँ हमेशा हँसी-ख़ुशी का माहौल रहता है और सच में एक घर को जैसा होना चाहिए वैसा ही मेरा घर है।
हमारी सबसे बड़ी लड़की ने, जो पूरी तरह अपनी माँ पर गयी है, जोन स्पैटर के सबसे बड़े बेटे से शादी की। हमारे दोनों परिवारों के बीच लगाव के और भी सूत्र हैं, जिनसे हम बहुत करीबी से बँधे हुए हैं। जिस शाम हम सब इकट्ठा होकर बैठते हैं- और ऐसा अक्सर होता है- वह शाम बेहद ख़ुशनुमा होती है और जोन और मैं अपने बीते दिनों के बारे में और उस ख़ास मक़सद के बारे में बातें करते हैं, जो हम दोनों के बीच सदा से है।
सच कहूँ तो, अपने किले में मुझे यह नहीं मालूम कि अकेलापन क्या है। हमारी संतान या हमारे नातियों-नतिनियों में से कोई न कोई हमारे आसपास होता है। अपने वंशजों की नन्ही किलकारी सुनना कितना सुखद है- ओह! कितना सुखद है!
मेरी प्रियतमा, चिर समर्पिता पत्नी- वफ़ा, प्रेम, सहयोग, सहनशीलता और सांत्वना की मूर्ति है। वह इस घर का अनमोल वरदान है। हमारे समस्त सौभाग्य की वही जननी है। हमारा परिवार बहुत हद तक एक संगीतमय परिवार है। जब कभी क्रिस्टियाना मुझे थोड़ा थका या उदास देखती है तो वह दबे पाँव पियानो के पास चली जाती है और एक मधुर गीत गाती है जिसे उसने पहली बार मंगनी के समय गाया था। मैं इतना कमजोर आदमी हूँ कि मैं किसी और स्रोत से उस धुन को नहीं सुन सकता। एक बार लिटिल फ्रैंक के साथ मैं थियेटर गया था। जब वहाँ उन लोगों ने यह धुन बजायी , तो उस बच्चे ने आश्चर्य प्रकट किया था, ''कजन माइकेल, ये किसके गर्म आँसू हैं, जो मेरे हाथ पर टपके हैं!''
तो मेरा किला ऐसा है। मेरी ज़िन्दगी का वास्तविक सच वहीं सुरक्षित है। मैं अक्सर लिटिल फ्रैंक को वहाँ ले जाता हूँ। मेरे नातियों-नतिनियों को वह बहुत भाता है। वे साथ-साथ खेलते हैं। साल के इस समय- क्रिसमस और नये साल के समय- मैं अपने किले से शायद ही बाहर निकलता हूँ, क्योंकि ऐसा लगता है जैसे इस मौसम की पुरानी यादें मुझे वहीं रोकती हैं और इस मौसम का इशारा भी इसी ओर है कि मुझे वहीं रुकना चाहिए।
'' और किला....'' श्रोताओं में से एक गम्भीर और सहृदय स्वर उभरा।
''हाँ, मेरा किला,'' निर्धन कुटुम्बी ने आग की ओर टकटकी लगाये, अपना सिर हिलाते हुए कहा, '' हवा में है। हमारे परम आदरणीय मेज़बान जोन ने उसका पता बिलकुल सही-सही बताया। मेरी कहानी पूरी हुई। क्या आप कृपा कर इस सिलसिले को आगे बढ़ायेंगे?''
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