Tuesday, August 3, 2021

दावत (भाग प्रथम)

 प्लेटो 


अपोलोदोरस - यदि तुम उस दावत के बारे में जानना चाहते होतो मैं तुम्हें बता सकता हूँ , क्योंकि अभी  हाल  ही  में मुझे इस संबंध में अपनी  याददाश्त  तरोताज़ा करने का मौक़ा  मिला था। परसों जब मैं अपने घर फलेरम से शहर  आ रहा था तो पीछे से मेरे एक दोस्त ने मुझे देखा और चूंकि मैं उससे बहुत आगे था,  इसलिए पुकारा-  अपोलोदोरस! क्या मेरे लिए इंतज़ार नहीं कर सकते

 

मैं रुककर उसका इन्तज़ार करने लगा।

 

पास आने पर वह बोलाअपोलोदोरसमैं तुम्हें ही खोज रहा था।  मैं तुमसे अगथोन के घर हुई उस दावत के बारे में जानना चाहता हूँ जिसमें सुकरातअल्सिबायदीज़ और दूसरे बड़े-बड़े लोग रात्रिभोज के लिए जुटे थे। सुनावहां सबने प्यार पर भाषण दिए।  मैंने इस बारे में एक शख़्स से सुना जिसे फिनिक्स ने बताया थालेकिन उसकी जानकारी आधी-अधूरी थी। उसी ने सुझाव दिया क़ि बेहतर होगा मैं तुमसे पूछूं। इसलिएअपोलोदोरसतुम्हें मुझे पूरी बात बतानी होगीक्योंकि तुम जानते होहम सब तुम्हारे प्रिय सुकरात के बारे में जानने  के लिए तुमपर कितने  निर्भर हैं। लेकिन शुरू करने के पहले यह बताओ क़ि क्या तुम ख़ुद उस दावत में शरीक थे

 

मैंने कहा - पता नहीं तुम्हें यह जानकारी किसने दी हैलेकिन  यदि  उसकी बातों से ऐसा लगा कि यह घटना इतनी नयी है कि मैं भी उसमें शरीक हो सकता था तो सचमुच उसकी जानकारी आधी-अधूरी ही रही होगी।

 

मुझे ऐसा ही लगा- उसने कहा।

 

मेरे मित्र ग्लावकोनमैंने कहाऐसा कैसे हो सकता हैक्या तुम यह भूल गए कि अगथोन कितने दिनों से एथेंस से बाहर हैऔर क्या तुम नहीं जानते कि पिछले दो-तीन सालों से ही मैं सुकरात के साथ ज़्यादा  समय बिताने लगा हूँ और हर दिन वह क्या कहता और क्या करता है - इसकी ख़बर रखने लगा हूँ?  तुम्हें पता है कि उससे पहले मैं यूँ ही यहाँ से वहां भटकता रहता था और सोचता था मेरी ज़िंदगी बड़ी रोचक और भरपूर है - जबकि असलियत यह थी कि मैं बेहद दुखी था। मेरी  ज़िंदगी ठीक वैसी ही थी- जैसी तुम अभी जी रहे होक्योंकि मैं जानता हूँ तुम भी दार्शनिक विचारों  से दूर-दूर भागते हो।

 

ग्लावकोन ने कहा- अब तुम फिर से मेरी घेराबंदी मत करोबल्कि यह बताओ कि  यह दावत आख़िर हुई कब

 

मैंने कहा- यह दावत तब दी गयी थी जब हम दोनों ने ककहरा सीखना  शुरू  ही किया था।  अगथोन को पहले दुखांत नाटक पर पुरस्कार मिला थाजिसकी ख़ुशी में उसने अपने सभी अभिनेताओं के साथ विजयोत्सव मनाया था। दावत  उसके अगले दिन दी गयी थी।

 

अच्छा!- उसने कहा- तब तो यह कई साल पहले की बात है। लेकिन तुम्हें किसने बताया - क्या ख़ुद सुकरात ने ?

 

नहींनहीं - मैंने कहा - मैंने उसी से सुना हैजिससे फिनिक्स ने सुना था -  साइदाथेनियम के  अरिस्तोदेमस   से।  हमेशा नंगे पांव रहनेवाला ठिगने  क़द का अरिस्तोदेमस ख़ुद वहां मौजूद था। मेरा अनुमान  है कि उन दिनों वह सुकरात के सबसे बड़े मुरीदों में से एक था।  दरअसल बाद में मैंने एक-दो मुद्दों पर सुकरात से भी चर्चा की और उसने भी वही बताया जो मैंने अरिस्तोदेमस से सुना था। 

 

ठीक है- ग्लावकोन ने कहा - तो तुम शहर पहुँचने तक इस बारे में बताते चलो।  इससे हमारा समय  अच्छी  तरह कटेगा।  

 

और इस तरह मैं पूरे रास्ते उसे उस दावत का वृतांत सुनाता रहा।  पूरी घटना मुझे इस तरह  याद  है जैसे कल की बात हो।  यदि तुम भी सुनना चाहते हो तो मैं फिर से शुरू कर सकता हूँ। सच तो यह है कि दार्शनिक बातें सुनने-सुनाने में मुझे जो सुख मिलता हैवह मुझे और किसी चीज़ में नहीं मिलता।  जब बातचीत दुनियावी  विषयों पर होती है- जैसा कि तुमलोग अक्सर ख़रीद-फ़रोख़्तधन-संपत्ति आदि की बातें करते हो- तो मुझे ऐसी सारी बातचीत बड़ी उबाऊ लगती है।  यह सोचकर मुझे  दुःख होता है कि मेरे दोस्त अपने  आपको बहुत कामकाजी  समझते हैंजबकि सच यह है कि  वे कुछ भी नहीं कर रहे हैं। मैं यह जानता हूँ कि मेरे बारे में तुमलोगों की क्या राय है: तुमलोग  यह सोचते हो कि मैं एक बेचारा बदनसीब शख़्स हूँ और शायद तुमलोग सही भी हो,  लेकिन मैं सोचता नहीं बल्कि जानता हूँ कि तुमलोग सचमुच बदनसीब  हो।

 

मित्र:  फिर वही बातअपोलोदोरस! हमेशा अपने साथ-साथ सबकी मिट्टी पलीद  करना ! ऐसा लगता हैजैसे तुमने एक अजीबो ग़रीब धारणा बना रखी है कि एक अकेले सुकरात को छोड़कर  पूरी दुनिया दुःख के भीषण गर्त में पड़ी हुई है।  हर वक़्त तुम्हारी यही मुद्रा रहती है- अपने आप पर और सुकरात के अलावा हम सब पर ताने कसते रहना। शायद यही  कारण है कि लोग तुम्हें पागल समझते हैं।

 

अपोलोदोरस-  मेरे दोस्तपागल तो मैं हूँ ही। यदि पूरी तरह पागल नहीं होता तो अपने बारे में या अपने दोस्तों के बारे में यह सब कैसे सोचता!

 

मित्र: अब बस भी करो अपोलोदोरस! बात को किसी और दिशा में मोड़ो मत। मैं  जो   पूछ रहा हूँ केवल उसी का जवाब दो।  प्यार के बारे में ये भाषण  किस  तरह के थे 

 

अपोलोदोरस- ठीक हैबताता हूँ।  ये भाषण कुछ इस तरह के थे- लेकिन शुरू से ही बताना ठीक रहेगा। मैं अरिस्तोदेमस के शब्दों में ही बताता हूँ।

 

उसने मुझे बताया - मैंने देखा कि  सुकरात नहा-धोकरसज-धजकरनए जूते पहनकरजबकि वह आम तौर पर नंगे पाँव ही रहता हैकहीं जा रहा था। मैंने उससे पूछा इस तरह से बन-ठनकर कहाँ जा रहे हो?

 

मैं अगथोन के घर रात्रिभोज के लिए जा रहा हूँ,  सुकरात ने कहाकल जो   आम जलसा हुआ थाउसमें भारी भीड़ के डर से मैं  नहीं गया थालेकिन मैंने वचन दिया था कि आज शाम  आऊंगा। मैंने  यह वेष इस लिए अपनाया है ताकि इतने बड़े आदमी का निरादर  न हो।  लेकिन तुम क्या कर रहे हो?  क्या दावत में बिन बुलाये मेरे साथ  आना चाहोगे?

 

जैसा तुम उचित समझोमैंने जवाब दिया।

 

तब चलोउसने कहाहम इस कहावत के अनुसार चलेंगे-`भले आदमी की मेज़ पर भले आदमी बिन बुलाये भी जाते हैं।'  हालाँकियदि सोचकर देखो  तोहोमर ने इस कहावत का ठीक प्रयोग नहीं किया है। उसने एगमेम्नन को ताकतवर  और जुझारू दिखाया हैजबकि मेनिलियस को अति साधारण भालाबरदार।  जब एगमेम्नन बलि देने के बाद उत्सव मना रहा होता  है तो मेनिलियस बिन बुलाये आता है - यानी एक गुणवान आदमी के भोज में एक गुणहीन आदमी बिन बुलाए आता है।

 

मैंने कहा- जहाँ तक मेरी बात है होमर का दृष्टान्त मेरे ऊपर पूरी तरह लागू होता है- एक बिन बुलाया मूर्ख एक ज्ञानी के घर रात्रिभोज पर जा रहा है। बेहतर होगा तुम रास्ते भर सोचो कि तुम मेरे लिए क्या बहाना बनाओगेक्योंकि मैं इसके लिए माफ़ी नहीं मांगनेवाला कि मैं बिन बुलाये आया हूँ। मैं कहूँगा कि मुझे तुमने बुलाया है।

 

बहाने बनाने के लिए भी एक से भले दोउसने कहाचलोचलें तो।

 

अरिस्तोदेमस ने बतायाइस मुद्दे को तय करने के बाद हम दोनों चल पड़े।  लेकिन कुछ दूर चलने के बाद सुकरात अचानक किसी गहरे विचार में खो गया और उसकी चाल धीमी पड़ने लगी। जब मैं रुककर उसका इंतज़ार करने  लगा तो उसने मुझे इशारा किया कि मैं आगे बढूँ।   मैं अगथोन के घर पहुंचा तो दरवाज़ा पूरी तरह खुला हुआ था।  मैं असमंजस में पड़ गयाक्योंकि मेरे जाते ही एक नौकर  ने अन्दर का रास्ता दिखाया और वहां जुटे मेहमानों के सामने मेरे आने की घोषणा कर दी।  मेहमान पहले से ही मेज़  के  चारों ओर बैठे हुए थे और दावत शुरू ही होनेवाली थी।

 

अगथोन मुझे देखते ही चिल्ला उठा- अरे वाह अरिस्तोदेमस! ठीक रात्रिभोज के वक़्त! यदि तुम किसी काम से आये हो तो बाद में देखा जाएगा।  मैं तुम्हें कल ही निमंत्रण देने वाला थालेकिन तुम्हें पकड़ ही नहीं पाया!  यह तो बताओ  सुकरात कहाँ है?  क्या तुम उसे साथ नहीं लाये हो

 

मैंने पीछे मुड़कर देखासोचा सुकरात निकट आ चुका होगा - पर वह कहीं भी नहीं दिख रहा था। मैंने  उनको सफ़ाई दी कि हम दोनों साथ  ही आ रहे थे और दरअसल  मैं उसके आमंत्रण पर ही आया हूँ।

 

तुमने बड़ी मेहरबानी कीअगथोन ने कहालेकिन सुकरात को हो क्या गया

 

वह तो मेरे पीछे आ रहा थापता नहीं वह किधर गयामैंने कहा।

 

सुनोअगथोन ने अपने एक नौकर को पुकाराजरा दौड़कर देखो कहीं सुकरात दिखाई दे रहे हैंयदि दिखें तो उन्हें अन्दर ले आओ। और अबप्रिय अरिस्तोदेमस,  क्या मैं तुम्हें एरिक्ज़िमेकस की  बगल  में बैठाऊं ?

 

और इस तरहअरिस्तोदेमस ने बतायामैं बन-ठन कर  बैठ गया।इस बीच नौकर यह ख़बर लेकर आया कि हमारा मित्र सुकरात पड़ोसी की ड्योढ़ी में चला गया है।

 

वे वहीँ पर खड़े हैं- नौकर ने बताया- और जब मैंने इधर अन्दर आने कहा तो  वे नहीं आये।

 

बड़ी अजीब बात है- अगथोन बोला- तुम उनके पास फिर जाओ और यहाँ आने के लिए ज़ोर दो।

 

यहाँ पर मैंने टोका- ऐसा मत करो। सुकरात को अभी  अकेला छोड़ दो। समझो  यह उसकी  आदत है।  अचानक कहीं चला जाएगा और खड़ा हो जाएगा।  इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह जगह कहाँ है।  मुझे यक़ीन   है कि थोड़ी देर बाद ही वह हमारे साथ  होगा- इसलिए उसके बारे में परेशान होने की  ज़रूरत  नहीं है।

 

तब ठीक है- अगथोन ने कहा- तुम बेहतर जानते होगे। अपने नौकरों की ओर मुड़ते हुए उसने कहाअब हमलोग इन्तज़ार नहीं करेंगे।  तुमलोग हमें अच्छा से अच्छा खाना खिलाओ।  क्या-क्या पकवान होंगे यह सब तुमलोग तय करो। जानता हूँ यह एक नयी बात है - लेकिन  तुमलोगों को सिर्फ़ यह ध्यान में रखना है कि हम सब तुम्हारे मेहमान हैं।  अब शुरू करो और दिखाओ कि तुमलोग क्या कर सकते हो!

 

इस तरह हमारा रात्रिभोज शुरू हुआ।  सुकरात का अब भी कोई पता नहीं था। अगथोन ने एक बार फिर नौकरों को भेजना चाहालेकिन मैंने उसे मना कर दिया।  अंत में जब वह आयातब तक हम सबका लगभग आधा खाना हो चुका थाजो  एक तरह से उसके लिए अच्छा ही था।

 

जैसे ही वह अन्दर आयाअगथोनजो मेज़ के आखिरी सिरे पर अकेला  बैठा हुआ थापुकार उठा- सुकरातइधर आओ और मेरे पास बैठो। मैं जानना चाहता हूँ कि पड़ोसी की ड्योढ़ी में किस महान विचार ने तुम्हें रोक रखा था।  मुझे यक़ीन है तुमने उस विचार को समझ लिया होगानहीं तो अभी भी तुम वहीँ खड़े रहते।

 

प्रिय अगथोनउसकी बगल में बैठते हुए सुकरात ने कहाकाश ऐसा होता कि बुद्धि कोई ऐसी  चीज  होती जिसे किसी की बगल  में बैठकर बाँटा  जा सकता- कोई ऐसी चीज जो भरे से खाली  की ओर जातीजैसे दो प्यालियों में पानी धागे के एक छोटे टुकड़े के सहारे समान स्तर पर आ जाता है।  यदि ऐसा होता तो मैं तुम्हारी बगल में बैठकर अपने आपको बधाई दे रहा होता क्योंकि अब तक  मैं  एक नायाब क़िस्म की बुद्धिमत्ता से लबालब हो गया होता। मेरी समझ तो धुंधली हैकिसी सपने जैसी भ्रामकलेकिन तुम्हारी बुद्धिअगथोनचमत्कृत करने वाली है। हम सब कैसे उस दिन को भूल सकते हैंजब तुम तीस हजार से भी अधिक यूनानी नागरिकों की आँखों  के सामने एक ज्योतिर्पूंज की तरह चमक रहे थे!

 

सुकरातअगथोन ने कहामैं जानता हूँ कि तुम मेरा मज़ाक़ उड़ा रहे हो। बुद्धि का सवाल तो मैं बाद में पूछूँगाजिसका फैसला बैकस (सुरापान के देवता) करेंगे। अभी जरा अपने खाने में दिलचस्पी  दिखाओ।

 

इस तरह सुकरात ने सबके साथ भोजन किया और देवता की पूजा   और  स्तुति   के बाद  सबका ध्यान   सुरापात्र की ओर गया। जहाँ तक अरिस्तोदेमस को याद हैबातचीत की शुरुआत पासेनियस ने की।

 

सज्जनोउसने सबको संबोधित करते हुए कहाआपका क्या ख़्याल हैहमलोग  यह रात किस तरह मनाने वाले हैं?  जहाँ तक मेरी बात हैमैं आज पूरे रंग में नहीं हूँ।  अभी भी पिछली रात की ख़ुमारी  बाकी है।  आपलोग भी कुछ बेहतर नहीं दिख रहे हैं।  दरअसल हम सब एक ही नाव में थे।  फिर भीसुरापान के सम्बन्ध में आप सब का क्या इरादा है

 

तुमने सही सवाल पूछा है पासेनियसएरिस्तोफनीज़  बोलासुरापान को बोझ मत बनाओ।  मैं तो पिछली रात  नशे में चूर हो गया था।

 

मैं पूरी तरह सहमत हूँएरिक्ज़िमेकस  ने कहासिर्फ़ मैं यह जानना चाहता हूँ कि अगथोन क्या चाहता हैक्या वह पिछली रात के असर से उबरकर आज के सुरापान के लिए तैयार है?

 

नहीं-नहींअगथोन ने कहामुझे इससे बाहर  रखो।

 

चलो मेरे लिए यह अच्छा हैएरिक्ज़िमेकस ने कहाऔर अरिस्तोदेमसफिदरस जैसे दोस्तों के लिए भी। हम लोग आपलोगों की तरह ज़बरदस्त सुरापान नहीं कर सकते।  मैं यह सुकरात के बारे में नहीं कह रहा हूँ। वह तो छक कर पीनेवालों और एक घूँट भी न लेने वालों-  दोनों का साथ निभा सकता है। आज चूँकि कोई भी जमकर पीना नहीं चाहताइसलिए इस मौके का लाभ उठाते हुए मैं नशे की असलियत के सम्बन्ध में कुछ कहना चाहूँगा।  औषध विज्ञान के अनुभव के आधार पर मैं यह पूरे यक़ीन के साथ कह सकता हूँ कि अत्यधिक सुरापान आदमी को नुकसान पहुंचाता है।  इसलिए मैं अत्यधिक सुरापान का न तो अपने लिए और न अपने दोस्तों के लिए समर्थन कर सकता हूँ- ख़ासकर तब जब हम पिछली रात के अतिरेक के असर से अभी तक पूरी तरह नहीं  उबर पाए हैं।

 

यहाँ फिदरस बोल उठाप्रिय एरिक्ज़िमेकस,  मैं हमेशा वही करता हूँ जो तुम कहते  होख़ासकर तब जब बात `चिकित्सक के  आदेशके रूप में कही जाती है।  मेरी राय है कि दूसरे लोग भी तुम्हारी बात मानें तो अच्छा होगा।

 

इस पर आम सहमति हुई कि यह पीने-पिलाने वाला  जलसा नहीं होगा। मदिरा केवल स्वाद बदलने के लिए थोड़ी मात्रा में दी जाएगी।

 

बहुत अच्छाएरिक्ज़िमेकस ने कहाचूंकि हम सब इससे सहमत हैं कि हम उतना ही पियेंगे जितना हमारे लिए हितकर हैमेरा यह भी प्रस्ताव है कि हम वंशी-बालाओं को भी कहें कि वे अन्दर जाकर महिलाओं के बीच अपनी कला का प्रदर्शन करें।  हम आज की शाम चर्चा-परिचर्चा में बिताएंगे - विषय  का नामयदि आप सब अनुमति देंतो मैं बताने को तैयार हूँ।

 

सबने  उसके प्रस्ताव का जोरदार समर्थन किया।

 

एरिक्ज़िमेकस ने आगे कहा जैसा कि  युरिपिदीज़  के  नाटक में मेलनिप्पे ने कहा है , “यह कथा मेरी  अपनी  नहीं है'', वैसे ही जो मैं  कहने जा रहा हूँ, वह दरअसल मेरे अज़ीज़ दोस्त फिदरस का विचार है।  वह मेरे पास बार-बार एक  शिकायत लेकर आता  रहा है। उसका कहना है कि  दूसरे देवी-देवताओं के सम्मान में इतनी सारी प्रार्थनाएँ और विरुदावलियाँ हैंलेकिन यह कितनी असाधारण बात है कि आज तक  किसी भी कवि ने प्रेम जैसे प्राचीन और प्रभुताशाली  देवता के सम्मान में कोई  विरुदावली नहीं रची है।

 

फिदरस ने मुझे कहा कि प्रोदिकस जैसे विद्वान लेखकों का उदाहरण लेंजिन्होंने हेराक्लीज़ और अन्य  अनेक वीरों की गद्य में विरुदावली रची है - और ऐसा करना गलत भी नहीं हैलेकिन क्या तुम जानते हो मैंने एक पुस्तक  देखी है जिसमें नमक के उपयोग बताये गए हैं और अतिरंजित शब्दों में नमक की प्रशंसा भी  की गयी है। न केवल नमक बल्कि रोज़मर्रा के काम की हर वस्तु का विस्तार से बखान मिलता है।  इसलिएएरिक्ज़िमेकस , क्या यह एक असाधारण बात नहीं है कि ऐसी मामूली चीज़ों पर ग्रन्थ लिखे गए हैंलेकिन प्रेम देवता की महिमा का वर्णन करने का साहस आज तक किसी कवि ने नहीं किया। यह आश्चर्य की बात है कि इतने बड़े देवता के प्रति इतना कम आदर दर्शाया गया है।

 

तो दोस्तोफिदरस ने ऐसी शिकायत की है और मेरे विचार में उसकी शिकायत  वाजिब है। इसलिए मैं  न केवल अपने उदगार  द्वारा उसकी शिकायत दूर करना चाहता हूँबल्कि मेरे विचार में हम  सब  के लिए यह एक सुनहरा मौका है जब हममें से हर कोई  प्रेम देवता के सम्मान में कुछ कह  सकता है। इसलिए,  दोस्तो,  यदि आप सब राज़ी हों तो हम यह शाम एक  ख़ूबसूरत चर्चा में बिता सकते हैं।  मेरी राय में सबसे अच्छा तरीक़ा यह होगा कि हम सब बाएं से दायें बारी-बारी से बोलें और अपनी -अपनी क़ाबलियत का भरपूर इस्तेमाल करते हुए प्रेम देवता की बडाई करें।  अच्छा होगा  चर्चा  की शुरुआत फिदरस करे क्योंकि न केवल मेज़ पर उसका पहला स्थान हैबल्कि इस चर्चा का असली सूत्रधार   भी वही है।

 

मेरे विचार मेंएरिक्ज़िमेकस,  प्रस्ताव  सर्व-सम्मति से पारित समझो,  सुकरात ने कहा,  जहाँ तक मेरी बात है मैं इससे  असहमत नहीं हो  सकताक्योंकि प्यार इस दुनिया में एक ऐसी चीज़ है जिसे समझने का मैं दावा करता रहा हूँ। अगथोन और पासेनियस भी इससे असहमत नहीं हो सकते और न ही एरिस्तोफनीज़  हीजिसकी  जिंदगी  दायनायसस और एफ्रदायती को समर्पित  रही है।  यहाँ उपस्थित मेरे अन्य दोस्तों को  भी कोई एतराज़ नहीं होगा।  हाँयह बात ज़रूर है कि बोलने का जो क्रम निर्धारित हुआ है वह मेज़ के आखिरी सिरे पर बैठनेवाले हम जैसों के लिए भारी पड़नेवाला है।  फिर भीयदि पहले के वक्ताओं ने कुछ पते की बात कही तो हमें शिकायत का मौका नहीं मिलेगा। इसलिए मैं फिदरस को शुभकामनाएँ देते हुए प्रेम की विरुदावली  आरम्भ करने का अनुरोध करता हूँ।

 

सबने एक स्वर से फिदरस को आरम्भ करने के लिए कहा-  लेकिन आगे  बयान करने से पहले मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि अरिस्तोदेमस ने यह कभी नहीं कहा कि उसे सारे भाषण अक्षरशः याद हैं और न ही मैं अरिस्तोदेमस से सुनी सारी बातों को हू-ब-हू दोहरा सकता हूँ।  मैं केवल ऐसे अंश ही दोहरा सकता हूँ जो वक्ता के कारण या उसमें छिपे विचार के कारण मेरी स्मृति में रह गए हैं।

 


 


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